तेरा साथ…

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तेरे मिलने से मैं बेफ़िकर हो गयी ,
सारी दुनिया से मैं बेखबर हो गयी,
तेरी सोहबत का असर यूँ हुआ,
तेरी -मेरी बातों में ही शाम बसर हो गयी,
यूँ अकेलेपन से मैं घबराती नहीं,
पर तेरे साथ से मंज़िल थोड़ी आसान हो गयी,
मेरी दुनिया का दायरा तुझमें सिमटा नहीं ,
पर हमारी दुनिया थोड़ी और बड़ी हो गयी,
तेरे शब्दों ने जो छुआ मेरे मन को ,
तेरी हर कविता मेरे लिए गज़ल हो गयी,
कल रात तेरी गज़लों को जब गुनगुनाने लगी,
मुझे खबर नहीं कब सुबह हो गयी ,
तुझको मैं ज़्यादा कुछ कह पाती नहीं,
पर तुझे मुझको पढ़ने की आदत हो गयी ,
मैं तो अपने ही ख़यालों में डूबी थी ,
खुशी हुई,
जब जाना मुझसे ज़्यादा तुझे मेरी फिक्र हो गयी…

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