फासला

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न तुम मुझसे हाल-चाल पूछते हो,
न मैं तुमसे कोई नयी बात…

न तुम मुझे हाल- ऐ-दिल बताते हो ,
न मैं तुमसे करूँ कोई दिल की बात…

न तुम्हें मुझसे कोई शिकवा है,
न मुझे तुम से कोई शिकायत…

पर फिर भी अब बहुत कुछ अधूरा है…
जो शायद पहले कभी पूरा था

कल तुम ने अचानक ही पूछ लिया
“हमारे बीच ये क्या हो गया है?”

मैंने अपनी ही लहज़े में कह दिया
“हम में फासला हो गया- ख्‍यालातों का, विचारों का , जज़्बातों का…”

न तब से तुमने कुछ कहा है ,
न मैंने कुछ पूछा…

समझ आया, यही फासला हो गया है।

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