September

sehanshakti ki parakaastha

कुछ दूर चले, फिर और चलने लगे, फिर सोचा उड  भी लें,गलत  न तो रास्ते  थे, न चले हम यूँ थे ,पर कुछ समझ नहीं आया ,चलते गये और चलते गयेकई सवाल लिए केवल चलते रहे ,कई  बार  गिरे , कई बार उठे ,कई बार चलते - चलते हम यूँ रुके ,पर  सम ...